भोपाल में गणेश उत्सव 2026 की शुरुआत के साथ ही शहर के अलग-अलग इलाकों में गणेश पंडाल और झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। इस साल राजधानी में करीब 1,800 स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
14 सितंबर से शुरू हुआ दस दिवसीय गणेश उत्सव 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य पंडाल, झांकियां और विशेष सजावट देखने को मिल रही है।
इस बार भोपाल की कुछ झांकियां अपनी अलग थीम, बड़ी गणेश प्रतिमाओं और पारंपरिक सजावट के कारण खास चर्चा में हैं।
1. Peepal Chowk का Bhopal Ke Raja हुआ 80 साल का
भोपाल की सबसे प्रसिद्ध गणेश परंपराओं में Bhopal Ke Raja का नाम प्रमुख है।
Old Bhopal के Peepal Chowk पर स्थापित होने वाले Bhopal Ke Raja ने इस साल अपनी सार्वजनिक गणेश उत्सव परंपरा के 80 वर्ष पूरे किए हैं।
श्री डोल ग्यारस समिति द्वारा यह परंपरा 1947 से चली आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार 1947 और 1948 में परिस्थितियों के कारण प्रतिमा दुकान में स्थापित की गई थी, जबकि 1949 से सार्वजनिक रूप से गणेश उत्सव मनाया जाने लगा।
इस साल भी यहां करीब 6 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा को रोजाना अलग-अलग ताजे फूलों से सजाया जा रहा है और भगवान गणेश को छप्पन भोग भी लगाया जा रहा है।
Bhopal Ke Raja के साथ Riddhi-Siddhi और Shubh-Labh की प्रतिमाएं भी यहां आकर्षण का हिस्सा हैं।
Bhopal Ke Raja की खासियत
- स्थान: Peepal Chowk, Old Bhopal
- परंपरा: 80 वर्ष
- गणेश प्रतिमा: करीब 6 फीट
- रोजाना फूलों से विशेष सजावट
- छप्पन भोग की व्यवस्था
- Riddhi-Siddhi और Shubh-Labh की प्रतिमाएं
2. New Market में दिखेगी Dagdusheth Ganpati Temple की झलक
भोपाल के New Market में इस बार गणेश उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण पुणे के प्रसिद्ध Shrimant Dagdusheth Halwai Ganpati Temple की replica है।
यहां करीब 3,000 वर्ग फीट के पंडाल में विशेष सजावट की गई है और लगभग 13 फीट ऊंची भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है।
Dagdusheth Temple की थीम के कारण New Market का यह पंडाल गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है।
New Market पहले से ही भोपाल के प्रमुख shopping और public gathering areas में शामिल है, इसलिए गणेश उत्सव के दौरान यहां शाम के समय लोगों की अच्छी आवाजाही देखने को मिल रही है।
3. Sindhi Colony की Simhastha थीम वाली गणेश झांकी
भोपाल की Sindhi Colony में इस बार गणेश पंडाल को Simhastha थीम पर तैयार किया गया है।
इस झांकी में Mahakal और Kshipra River को थीम का हिस्सा बनाया गया है।
भोपाल में आने वाले समय में Simhastha को लेकर भी तैयारियां और चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में गणेश उत्सव के दौरान Simhastha से जुड़ी धार्मिक थीम वाली झांकी लोगों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है।
4. Indrapuri Ke Raja की Kantara थीम वाली झांकी
इस साल भोपाल की सबसे अलग और चर्चित झांकियों में Indrapuri Ke Raja का नाम भी सामने आया है।
Indrapuri में गणेश पंडाल को South Indian फिल्म Kantara से प्रेरित सांस्कृतिक थीम पर तैयार किया गया है।
इस पंडाल में भगवान गणेश को बीच में रखा गया है, जबकि दोनों तरफ Guliga और Panjurli Devta के स्वरूप दिखाए गए हैं।
पंडाल की सजावट में पारंपरिक designs, artwork और coastal Karnataka की लोक परंपराओं से प्रेरित elements का इस्तेमाल किया गया है।
यह झांकी इसलिए भी अलग है क्योंकि सामान्य गणेश पंडालों से अलग इसमें तीन धार्मिक स्वरूपों को एक साथ थीम का हिस्सा बनाया गया है।
5. Mata Mandir में 17 फीट की गणेश प्रतिमा
Mata Mandir क्षेत्र में इस बार करीब 17 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है।
बड़ी प्रतिमा के कारण यह पंडाल भी स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
भोपाल में हर साल अलग-अलग समितियां बड़ी प्रतिमाओं और अलग-अलग themes के माध्यम से अपने पंडालों को आकर्षक बनाने की कोशिश करती हैं।
6. Somwara में नंदी पर सवार गणपति
Somwara क्षेत्र की गणेश झांकी भी इस साल अपने अलग स्वरूप के कारण चर्चा में है।
यहां करीब 12 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसमें भगवान गणेश को नंदी पर सवार दिखाया गया है।
धार्मिक स्वरूप वाली इस झांकी में भगवान गणेश और नंदी को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।
7. Chandbad में चक्र धारण किए गणेश
Chandbad में इस बार भगवान गणेश की प्रतिमा को अलग स्वरूप में तैयार किया गया है।
यहां गणेश प्रतिमा में भगवान के हाथ में चक्र दिखाया गया है।
अलग-अलग धार्मिक प्रतीकों और स्वरूपों के साथ गणेश प्रतिमाओं को तैयार करने की परंपरा भोपाल के गणेश उत्सव की खास पहचान बनती जा रही है।
8. भोपाल में दिख रही हैं कई अनोखी गणेश प्रतिमाएं
इस साल भोपाल में केवल बड़े पंडाल ही नहीं, बल्कि अलग-अलग creative concepts वाली गणेश प्रतिमाएं भी लोगों का ध्यान खींच रही हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार शहर में giant blue whale theme, Bhopal Ke Raja और Balancing Bappa जैसी अलग-अलग तरह की प्रतिमाएं भी चर्चा में हैं।
इससे साफ है कि गणेश उत्सव में पारंपरिक भक्ति के साथ मूर्तिकारों और आयोजन समितियों की creative presentation भी देखने को मिल रही है।
भोपाल की प्रमुख गणेश झांकियां 2026 – एक नजर में
| स्थान | झांकी / प्रतिमा की खासियत |
|---|---|
| Peepal Chowk | 80 साल पुराना Bhopal Ke Raja |
| New Market | Dagdusheth Ganpati Temple replica |
| Sindhi Colony | Simhastha theme, Mahakal और Kshipra River |
| Indrapuri | Kantara-inspired theme |
| Mata Mandir | करीब 17 फीट की गणेश प्रतिमा |
| Somwara | नंदी पर सवार करीब 12 फीट के गणेश |
| Chandbad | हाथ में चक्र वाले गणेश |
| Old Bhopal सहित अन्य क्षेत्र | अलग-अलग creative और traditional themes |
इस बार भोपाल के गणेश उत्सव में Zero Waste पर भी जोर
गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडालों में पहुंचते हैं। इसके चलते नगर निगम ने इस साल पंडालों में स्वच्छता और waste management पर भी विशेष ध्यान दिया है।
भोपाल में करीब 1,800 स्थानों पर गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं और नगर निगम ने उत्सव को Plastic Free और Zero Waste बनाने की दिशा में पहल की है।
पंडालों में अलग-अलग प्रकार के कचरे के लिए डस्टबिन रखने तथा पूजा सामग्री और अन्य कचरे के उचित प्रबंधन पर जोर दिया गया है।
इस बार Zero Waste Jhanki और Zero Waste Bhandara के लिए पुरस्कार भी रखे गए हैं।
भोपाल में गणेश झांकियां कब तक देख सकते हैं?
भोपाल में गणेश उत्सव 14 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक चलेगा।
25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में विसर्जन जुलूस और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
जो लोग गणेश झांकियां देखने जाना चाहते हैं, वे शाम के समय अलग-अलग प्रमुख पंडालों का दौरा कर सकते हैं। हालांकि बड़े पंडालों में भीड़ और traffic को ध्यान में रखते हुए स्थानीय आयोजकों तथा प्रशासन की advisories का पालन करना जरूरी है।
Bhopal Ganesh Jhanki 2026 में क्या है खास?
इस बार भोपाल की गणेश झांकियों में कई अलग-अलग themes देखने को मिल रही हैं।
कहीं 80 साल पुरानी Bhopal Ke Raja की परंपरा है, तो कहीं Pune के Dagdusheth Ganpati Temple की replica बनाई गई है। Sindhi Colony में Simhastha theme देखने को मिल रही है, जबकि Indrapuri में Kantara से प्रेरित पंडाल तैयार किया गया है।
यानी इस बार भोपाल का Ganesh Utsav परंपरा, भक्ति और creative themes का मिश्रण दिखाई दे रहा है।
निष्कर्ष
भोपाल का गणेश उत्सव हर साल शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा रहता है। 2026 में भी शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में आकर्षक गणेश पंडाल और झांकियां तैयार की गई हैं।
Bhopal Ke Raja की 80 साल पुरानी परंपरा, New Market की Dagdusheth Temple replica, Sindhi Colony की Simhastha झांकी और Indrapuri की Kantara-inspired theme इस साल विशेष आकर्षण में शामिल हैं।
अगर आप इस गणेश उत्सव में भोपाल की झांकियां देखने निकल रहे हैं, तो अलग-अलग पंडालों की स्थानीय जानकारी और कार्यक्रम का समय देखकर जाना बेहतर रहेगा।
भोपाल की ऐसी ही local news, events, festivals और city updates के लिए BhopaliMitra.in पढ़ते रहें।
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