मध्य प्रदेश और पूरे देश के लिए wildlife conservation से जुड़ी एक बड़ी उपलब्धि के बीच Project Cheetah ने चार साल पूरे कर लिए हैं। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों के साथ शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब एक नए चरण में पहुंच चुका है। चार साल बाद भारत में चीतों की संख्या 52 हो गई है, जिनमें 32 चीते भारत में जन्मे हैं।
इस उपलब्धि के मौके पर 18 सितंबर 2026 को भोपाल के Van Vihar National Park में Cheetah Chaupal आयोजित की गई। रिपोर्ट के अनुसार यह पहली बार था जब Project Cheetah से जुड़ा मुख्य कार्यक्रम Bhopal में आयोजित किया गया; पहले ऐसे कार्यक्रम Kuno National Park में होते रहे हैं।
भारत में अब कितने चीते हैं?
चार साल की progress review के मुताबिक भारत में वर्तमान में कुल 52 चीते हैं।
इनमें:
- 49 चीते Kuno National Park में
- 3 चीते Gandhi Sagar Sanctuary में
- कुल 32 चीते भारत में जन्मे
हैं।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Project Cheetah का उद्देश्य केवल दूसरे देशों से चीते भारत लाना नहीं है। लंबे समय का लक्ष्य भारत में ऐसी population तैयार करना है जो प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रजनन करे और अलग-अलग suitable habitats में टिकाऊ population विकसित हो सके।
2022 में आठ चीतों से हुई थी शुरुआत
Project Cheetah की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब Namibia से लाए गए आठ चीतों को Kuno National Park में विशेष enclosures में छोड़ा गया था।
इसके बाद South Africa से भी चीते भारत लाए गए। 2026 में Botswana से भी नौ चीते भारत लाए गए, जिससे programme में genetic diversity बढ़ाने और population को मजबूत करने की दिशा में प्रयास जारी रहे।
चार वर्षों में programme का focus अलग-अलग stages से गुजरा है—पहले imported cheetahs को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाना, फिर breeding और cub survival पर ध्यान देना और इसके बाद कुछ चीतों को खुले जंगल में छोड़ना।
Kuno से Gandhi Sagar तक बढ़ा habitat
Project Cheetah की एक खास बात यह है कि अब चीता conservation केवल Kuno National Park तक सीमित नहीं है।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार तीन चीते Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary में हैं, जबकि बाकी 49 Kuno में हैं। इससे programme के लिए एक से ज्यादा suitable habitats विकसित करने की दिशा दिखाई देती है।
अगले चरण में suitable habitat का विस्तार और भारत में long-term cheetah meta-population तैयार करना programme का प्रमुख focus बताया गया है।
Kuno में खुले जंगल में भी घूम रहे चीते
Project Cheetah के चार साल पूरे होने तक Kuno में मौजूद 49 चीतों में से 17 खुले जंगल में हैं।
इनमें 10 नर और 7 मादा चीते शामिल हैं। बाकी 32 चीते फिलहाल soft-release boma यानी विशेष enclosure व्यवस्था में हैं, जिसमें एक साल से कम उम्र के 19 cubs भी शामिल हैं।
यह चरण programme के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि enclosure से खुले जंगल की ओर transition में चीतों का व्यवहार, hunting ability, territory movement और survival लगातार monitor किया जाता है।
भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़ना क्यों महत्वपूर्ण है?
Project Cheetah की long-term success को केवल imported animals की संख्या से नहीं देखा जाता।
अगर भारत में जन्मे चीते बड़े होकर survive करते हैं, breeding करते हैं और अगली generation पैदा करते हैं, तो इससे conservation programme की sustainability का आकलन करने में मदद मिलती है।
Status review के अनुसार programme के दौरान भारत में 32 चीते जन्मे हैं। इनमें से कई cubs के survival ने project के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है।
2026 में Kuno में Indian-born female cheetah से wild में चार cubs का जन्म भी conservation programme में एक महत्वपूर्ण milestone के रूप में सामने आया था।
Bhopal में क्यों हुआ Cheetah Chaupal?
इस बार Project Cheetah के चार साल पूरे होने से जुड़ा मुख्य programme Van Vihar, Bhopal में आयोजित किया गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने इस दौरान project की progress और भविष्य की योजनाओं पर जानकारी दी। Principal Chief Conservator of Forest (Wildlife) Samita Rajora के अनुसार देश में अब 52 चीते हैं और project की आगे की दिशा पर भी काम किया जा रहा है।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने चीतों के भारतीय वातावरण में adaptation और wild survival से जुड़े अनुभवों पर भी चर्चा की।
आगे Nauradehi में भी पहुंच सकते हैं चीते
Project Cheetah के अगले चरण में मध्य प्रदेश के Nauradehi Sanctuary, Sagar को भी संभावित habitat के रूप में देखा जा रहा है।
Bhopal में आयोजित Cheetah Chaupal के दौरान अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में चीतों को Nauradehi Sanctuary में translocate करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इससे मध्य प्रदेश में cheetah conservation का geographic footprint और बढ़ सकता है। हालांकि किसी भी translocation के लिए habitat suitability, prey base, veterinary preparedness और monitoring व्यवस्था जैसे factors महत्वपूर्ण होंगे।
चीतों की निगरानी आसान काम नहीं
खुले जंगल में छोड़े गए चीतों की monitoring एक बड़ी चुनौती है। हाल के महीनों में Kuno से कुछ चीते निर्धारित क्षेत्र से बाहर भी गए हैं, जिसके कारण आसपास के जिलों में monitoring बढ़ाई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार monitoring teams satellite tracking और ground-level teams की मदद से लगातार निगरानी करती हैं।
यह केवल चीतों की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में human-wildlife interaction को manage करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Bhopal के लिए Van Vihar क्यों खास है?
Van Vihar National Park Bhopal की पहचान से जुड़े प्रमुख wildlife destinations में से एक है। इसलिए Project Cheetah जैसे बड़े conservation programme से जुड़ा कार्यक्रम यहां आयोजित होना शहर के wildlife और environmental profile के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
Bhopal में wildlife awareness programmes के लिए Van Vihar एक natural venue है, जहां visitors को मध्य प्रदेश की wildlife conservation efforts को समझने का अवसर मिलता है।
हालांकि Kuno में मौजूद wild cheetahs और Van Vihar की captive/managed wildlife व्यवस्था को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। दोनों के conservation और management objectives अलग हैं।
Project Cheetah का अगला चरण क्या होगा?
चार साल पूरे होने के बाद programme अब केवल “चीतों को भारत वापस लाने” के चरण में नहीं है। अगली चुनौती है एक sustainable और geographically distributed population तैयार करना।
इसके लिए:
- suitable habitats की पहचान
- नए conservation landscapes तैयार करना
- breeding population को मजबूत करना
- cub survival बढ़ाना
- wildlife corridors पर ध्यान
- लगातार veterinary और field monitoring
जैसे क्षेत्रों में काम महत्वपूर्ण रहेगा।
भारत में चीतों की संख्या 52 तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण milestone है, लेकिन long-term conservation की सफलता का आकलन आने वाले वर्षों में population survival, reproduction और habitat expansion जैसे indicators से होगा।
BhopaliMitra की बात
Project Cheetah की चार साल की journey में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब भारत में सिर्फ दूसरे देशों से लाए गए चीते नहीं हैं, बल्कि 32 चीते भारत में जन्मे हैं।
Kuno National Park से शुरू हुआ programme अब Gandhi Sagar तक पहुंच चुका है और आगे Nauradehi जैसे संभावित habitats पर भी काम की बात सामने आई है।
भोपाल में आयोजित Cheetah Chaupal ने इस पूरी journey को एक बार फिर शहर के सामने रखा। आने वाले वर्षों में इस programme की असली चुनौती चीतों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनके लिए पर्याप्त habitat, prey base और सुरक्षित landscape तैयार करना होगी।
चार साल बाद Project Cheetah अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुका है—जहां focus सिर्फ चीतों की वापसी से आगे बढ़कर भारत में उनकी long-term conservation population तैयार करने पर है।

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